FAMUS SHAYARI

GULZAR BEST SHAYARI 


मिलता तो बहुत कुछ है इस ज़िन्दगी में,
​बस हम गिनती उसी की करते है जो हासिल ना हो सका

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मैं हर रात सारी ख्वाहिशों को खुद से पहले सुला देता,

हूँ मगर रोज़ सुबह ये मुझसे पहले जाग जाती है

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आइना देख कर तसल्ली हुई, 

हम को इस घर में जानता है कोई 

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वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर, 

आदत इस की भी आदमी सी है

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फिर वहीं लौट के जाना होगा,
यार ने कैसी रिहाई दी है

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कुछ अलग करना हो तो भीड़ से हट के चलिए, 

भीड़ साहस तो देती हैं मगर पहचान छिन लेती हैं

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अच्छी किताबें और अच्छे लोग, तुरंत समझ में नहीं आते, 
उन्हें पढना पड़ता हैं

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बहुत अंदर तक जला देती हैं, 
वो शिकायते जो बया नहीं होती

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मैंने दबी आवाज़ में पूछा? मुहब्बत करने लगी हो?
नज़रें झुका कर वो बोली! बहुत

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कोई पुछ रहा हैं मुझसे मेरी जिंदगी की कीमत,
मुझे याद आ रहा है तेरा हल्के से मुस्कुराना

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मैं दिया हूँ! मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अँधेरे से हैं, 

हवा तो बेवजह ही मेरे खिलाफ हैं

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बिगड़ैल हैं ये यादे, 
देर रात को टहलने निकलती हैं

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सुना हैं काफी पढ़ लिख गए हो तुम, 

कभी वो भी पढ़ो जो हम कह नहीं पाते हैं

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उसने कागज की कई कश्तिया पानी उतारी और, 

ये कह के बहा दी कि समन्दर में मिलेंगे

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कभी जिंदगी एक पल में गुजर जाती हैं, 
और कभी जिंदगी का एक पल नहीं गुजरता

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हम तो अब याद भी नहीं करते,
आप को हिचकी लग गई कैसे?

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GULZAR BEST SHYAYARI

BASHIR BADR FAMOUS SHYARI

दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएं तो शर्मिन्दा न हों

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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है
जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा

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जिस दिन से चला हूं मेरी मंज़िल पे नज़र है
आंखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा

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शौहरत की बुलन्दी भी पल भर का तमाशा है
जिस डाल पर बैठे हो, वो टूट भी सकती है

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मुहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला
अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला 

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उसे किसी की मुहब्बत का एतिबार नहीं
उसे ज़माने ने शायद बहुत सताया है

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