pyar ki kahani in hindi - gareeb ladke ka pyar


                   प्यार की कहानी इन हिंदी 

 गरीब का प्यार 

 दोस्तों ये कहानी बहुत ही खुबशुरत और दिल को छु जाने वाली है क्यों की ये कहानी एक सच्चे प्यार की है जहा  लड़का अपने सपनो को पूरा करने के लिए  बचपन से मेहनत करता है पारिवारिक स्थिति ख़राब होने की वजह से वो हमेशा दूसरे दोस्तों से काम बात करता था और ना ही कही घूमने जाता था उसकी दिनचर्या केवल पढ़ने में ही निकल जाती थी 
तो इस  कहानी में हम जानेंगे की किस तरह ये लड़का अपने सच्चे प्यार को पता है और अपने प्यार  पाने में उसे कितनी मुसीबतो का सामना करना पड़ता है | 

तो नमस्कार दोस्तों कहानी की सुरुवात करने से पहले मई आपको धन्यवाद देना चाहता हु की आपने हमारे इस पोस्ट पर क्लिक किया || 


तो हमारे कहानी की सुरुवात होती है एक छोटे से गरीब घर से जहा हमारा मुकेश रहता था उसकी सिर्फ एक ही ख्वाहिस थी की वो अपने घर को इस गरीबी से बहार निकाले उसके लिए वो हमेशा ही ो पड़ता रहता था | घर में हमेशा पैसो को लेकर चिंता लेकर चिंता रहती थी क्यों की मुकेश की एक बहन भी थी जिसकी सदी भी करना था | मगर पिता के पास कोई काम न होने के कारन उनके पिता मजदूरी किया करते थे और उन्ही की मजूरी से ही पूरा घर चलता था || 

मुकेश की बचपन की हसी भी इसी गरीबी और मज़बूरी ने छीन ली थी मगर मुकेश के पिता का सप्सापना था की उनका बीटा एक बड़ा व्यक्ति बने और खूब पैसे कमाए इसी के वजह से वो मुकेश को कभी भी काम में जाने नहीं देते हमेसा उसे पढ़ने के लिए ही कहते थे | और मुकेश भी उनके इस सपने को पुर करना चाहता था || 

अब मुकेश कक्छा बारहवीं की परीक्षा पास कर लेता है और अपने स्कूल में सब ज्यादा अंक भी लता है इश्के वजह से उसकी काफी तारीफे  होती है | और मुकेश के पिता बहोत गारव् महसूस करते है मगर अब बात है कॉलेज की मगर मुकेश के परिवार  के पास उतना  पैसा नहीं है   की मुकेश को किसी अचे कॉलेज में एड्मिशन दिला सके मगर उनके पास एक रास्ता था उस समय एक संस्था  थी  जो गरीबो  मदत करती थी बस उसके लिए  मुकेश को एक परीक्षा  दिलाना था और उत्तीर्ण आने पर उसे एक अच्छे कॉलेज में ऐमिडिन और सारा खर्चा वो संस्था उठाती 
तो मुकेश ने और मेहनत की और उस परीक्षा में भाग लिया || किस्मत भी आपकी मदत करने लग जाती है जब आप उसे बदलने की कोसिस मेहनत  से करते हो जी हां कुछ इस तरह ही मुकेश की मेहनत ने उसकी सफलता पहला कदम बढ़ा दिया मुकेश ने वो परीक्षा उत्तीर्ण कर ली और उसे दूर सहर में एक अच्छा कॉलेज भी मिल गया | 

अब मुकेश ने ठान लिया था की कभी हर नहीं मानूंगा और एक बड़ा व्यक्ति बन ही कर घर आऊंगा इसी इरादे के साथ वो चल पड़ा अपने आगि की पढाई करने | मगर ये पहली बार था जब मुकेह कभी अपने परिवार से दूर  गया हो इस लिए ये उश्के लिए बहोत अलग था बाहर का माहौल || 

अब मुकेश का पहला दिन था कॉलेज का वो काफी घबरा रहा था क्यों की वो कॉलेज काफी बड़ा था और वहा सरे बच्चे आमिर घर से थे इस वजह से उससे कोई बात भी नहीं कर रहा था | क्यों की मुकेश के कपडे उनके जैसे अच्छे नहीं थे मगर जब क्लास लगा तो प्रोफेसर ने मुकेश की तारीफ की इस लड़के के अंदर काफी काबिलियत है | जिससे पूरी क्लास ने वहा मुकेश के लिए तालियां बजे फिर प्रोफेसर ने एक और स्टूडेंट की तारीफ की जिसका नाम संध्या था जी है ये एक लड़की थी जिसने १२ में मुकेश के जितना ही मार्क्स लाया था मगर संध्या काफी आमिर घर इ थी जिसके वजह से उसका अड्मिशन डायरेक्ट हो गया था || 

फिर पुरे क्लास ने उन दोनों के लिए तालियां बजाई मगर संध्या को अच्छा नहीं लगा की उसे किसी के साथ compare किया जा रहा रहा है || मगर जब मुकेश ने संध्या को देखा  तो उश्के सकल में अलग सी मुस्कान आ गयी थी | कभी भी मुकेश के सकल में ऐसी मुस्कान नहीं आयी थी || जी है मुकेश को संध्या को देखते ही प्यार हो गया था || मगर संध्या उससे जलने लगी थी | 

अब इसी तरह रोज मुकेश उसे छीफ कर देखा करता था मगर संध्या उससे कभी बात नहीं करती थी | 

संध्या हमेशा से ही अपने स्कूल में टॉप करती आयी थी इश्के वजह से उसे अपने आप को किसी के साथ compare करना पसंद नहीं था | संध्या का स्वाभाव भी सीधा था वो भी किसी से बिना कोई वजह बात नहीं करती थी | उश्के पिता एक बिज़नेस मैन थे | और उसकी माँ का स्वर्गवास हो गया था जिसकी वजह से वो काफी दुखी रहती थी उसे अपने माँ की बहोत याद आती थी | 

और एक तरफ मुकेश अपने सपनो के लिए काफी मेहनत कर रहा था मगर मन ही मन वो संध्या से प्यार करने लगा था | एक बार मुकेश लाइब्रेरी में गया बुक पढ़ने और वह संध्या भी थी | मुकेश बुक लेने गया और रस्ते में संध्या से टकरा गया इश्के वजह से संध्या ने उसे काफी बुरा भला कह दिया | 
संध्या - तुम सब लड़के एक जैसे हो लड़की देखि नहीं की बत्तीमिजी पे उतर आते हो | 
मुकेश - मुहे माफ़ करिये मैंने जान बुझ कर नहीं किया गलती से टकरा गया | 



इस घटना के बाद मुकेश बहुत उदास हो गया मुकेश को बाहूत  बुरा लगा और वो कभी संध्या से बात ही नहीं कर पाया अब बरी आती है कॉलेज में कॉम्पीशन जिसमे मुकेश और संध्या को भाग लेने के लिए  बोला गया | इस बात पर  संध्या तो थी क्यों की इसी बहाने वो मुकेश को निचा दिखा सकती थी मगर मुकेश को संध्या के साथ कॉम्पीशन करना अच्छा नहीं लग रहा था | मगर वो कुछ कर भी नहीं सकता था क्यों की अगर मुकेश ये कॉम्पीशन जीतता तो उसे कॉलेज की तरफ से स्कॉलर शिप मिलती जिससे वो अपनी आगे की पढाई कर सकता था | 

खाई अब वो दोनों कॉम्पीशन की तयारी में लग जाते है | संध्या को अपने ऊपर काफी भरोसा था वही मुकेश थोड़ा डरा हुवा सा था | अब कॉम्पीशन का  दिन भी आ जाता है , मुकेश की घबराहट उशकी सकल से दिख रही थी , क्यों की वो अब भी संध्या से प्यार करता था और वो नहीं चाहता था की उशकी और संध्या की फिर से लड़ाई हो || 



दोनों ही कॉम्पीशन में भाग लेते है , और अपना 100 % देते है , मगर रिसल्ट एक हप्ते बाद आने वाला था | मुकेश की आगे की पढाई बाद इसी रिसल्ट पर टिका हुवा था मगर संध्या के लिए ये रिसल्ट बस मुकेश को निचा दिखाने के  लिए था | मगर एक दिन संध्या मुकेश से बात करती है | 
संध्या -  मुकेश तो रिसल्ट में अगर तुम फ़ैल हो गए तो क्या करोगे वैसे भी तुम फ़ैल ही होंगे क्यों की मैं आज तक कभी भी किसी एग्जाम में फ़ैल नहीं हुई 
मुकेश - ये तो मुझे पता नहीं की मै पास हूँगा या नहीं मगर मैंने अपना १००% दिया है अगर किस्मत रही तो जरूर पास हो जायेंगे मांगा मुझे भी लगता है की तुम ही पास होगी क्यों की तुम सही में मुझ से ज्यादा होशियार हो.. 

इतना सुनते ही संध्या का घमंड टूट गया क्यों की मुकेश ने ुश्कि काफी तारीफे की मगर संध्या ने हमेशा बस उशकी बेज्जती ही की थी | 
और मुकेश ने उस दिन के लिए फिर से सॉरी बोला मुकेश ने कहा मई सच में  उस दिन तुमसे गलती से टकराया था | और इस बार संध्या उसे माफ़ भी कर देती है 
संध्या ने कहा - मेरी भी गलती है मैंने बिना जाने तुमको बहोत बुरा भला बोल दिया था सॉरी | 
मुकेश ने संध्या को भी माफ़ कर दिया और उन दोनों में दोस्ती की सुरुवात भी हो गयी | 


अब दिन आ जाता है रिसल्ट का मुकेश अभी भी काफी डरा हुवा रहता है | अब दोनों रिसल्ट के लिए  ऑडिटेरियम में पहुंचते है जहा रिसल्ट का पता लगना था | जहा कॉलेज के ट्रस्टी , प्रोफेस्सर समेत काफी बड़े लोग थे , कुछ देर के के बाद रिसल्ट का ऐलान भी हो जाता है | 
प्रोफेसर - तो बड़ी ही खुसी के साथ हम आज इस कॉम्पीशन के इनर का नाम बताना चाहते है जिसने हमारे िश कॉलेज का नाम रोशन किया है वो नाम है संध्या कुमारी 

जी है ये कॉम्पीशन संध्या जीत जाती है , संध्या काफी खुस होती है और अपना इनाम लेने स्टेज पर  जाती है सारे लोग उश्के लिए तालिया बजाते है मगर मुकेश अहा से चला गया होता है , वो काफी उदाश हो जाता है इश्के आँखों स अंशु बहने  लगता है ुश्कि साड़ी म्हणत बेकरर हो जाती है और वो अंदर से टूट जाता है | मगर वो एक तरीके से खुश भी था क्यों की संध्या पास हो गयी थी और उन दोनों में अच्छी दोस्ती भी ही गयी थी मगर उश्के अंदर इतना हिम्मत नहीं था की वो जाकर संध्या को बधाई दे सके , इस लिए वो वह से चुप चाप चले जाता है। ..... 


हलाकि संध्या उसे ढूंढ़ती  है मगर मुकेश उसे नहीं दीखता है उसे समझ में आ जाता है की मुकेश उदाश है | तो ो उश्के दूसरे दिन कॉलेज आने का इंतजार करती है मगर मुकेश काफी डीप्रेशन में चले जाता है िश वजह से ो कॉलेज भी नहीं जाता है तो संध्या उश्के बारे में पता लगाती है तो उसे पता चलता है की मुकेश काफी गरीब घर से बिलनोग करता है उश्के ऊपर काफी जिम्मेदारियां है  और वो इस कॉलेज तक भी डोनेशन के मदद से पंहुचा है। .... 


तो संध्या के मन में उश्के लिए और भी रेस्पेक्ट बढ़ जाती है। .




इस कहानी का पूरा भाग हम कुछ ही दिनों में दाल देंगे कृपया छमा करे 
और अगर आपको ये कहानी पसंद आयी है तो कमेंट करके आपके सुझाव  हमें दे | 
धन्यवाद् 💓

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